आजादी की लड़ाई और आरएसएस का महत्वपूर्ण योगदान !


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आज संघ की बढ़ती लोकप्रियता ओर सर्वस्वीकार्यता से कुढ़कर कुछ मुर्खाधीश कांगी,वामी ,आपी,बसपे सपे जडुए ..भारत में फेसबुक के आफिस में बैठे "केम्ब्रिज एनलेटिका के प्रगतिशील दलाल" ! आरएसएस के देश की आजादी की लड़ाई में योगदान को शून्य निरूपित कर अक्सर प्रश्न उठाते हैं ....संघ का योगदान तो कम नही है  पर संघ से जुड़े बौद्धिक वर्ग में शौध ओर अध्ययन की प्रवृति वामपंथियो की तुलना में कम रह गया था ! जब स्वतंत्रता आंदोलन में संघ के योगदान को लेकर शौध ओर अध्ययन किया तो पता चला आरएसएस के संस्थापक डॉ हेडगेवार ओर स्वयंसेवको की देश की आजादी के लिए ,अंग्रेजो से लड़ाई ,गांधी नेहरू सहित कई बड़े नेताओं से अधिक त्यागमय थी ! .............Surendra Dalmia

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आरएसएस और आजादी की लड़ाई सम्भंधित 🇮🇳सप्रमाण जानकारी इस प्रकार है :
डॉ हेडगेवार जी ने 16 वर्ष की आयु में युवाओं में राष्ट्रीय घटनाओं पर चर्चा और क्रांतिकारी गुणों के विकास के लिए 1901 में चर्चा मण्डल "देशबंधु समाज "की शुरुआत की ।पढ़ें- (आर्म्ड स्ट्रगल फ़ॉर फ्रीडम , पृष्ठ 372 -बी एस हरदास )
डॉ हेडगेवार ने इस संगठन में शामिल होने के लिए जो प्रतिज्ञा रखी थी ..करितो संमित्र हो निश्च्च्ये ..अपर्णी देहास देश कारयी..अर्थात अपना शरीर और आत्मा मातृभूमि की सेवा में अर्पित करता हूँ पढ़ें (आर्म्ड स्ट्रगल फ़ॉर फ्रीडम , पृष्ठ 374 -बी एस हरदास )

Dr Hedgewar participating in the 1930 satyagraha against the British
Dr Hedgewar participating in the 1930 satyagraha against the British

डॉ हेडगेवार जी को स्कूल में अंग्रेज अफसर के निरीक्षण के समय "वन्देमातरम"के नारे लगवाने , नागपुर के मॉरिस कालेज सहित अन्य स्थानों पर 2000 छात्रों की हड़ताल कराने और भरी सभा मे अंग्रेजो से माफी मांगने से इनकार करने पर "सर रेजिंलेण्ड क्रडोक"के निर्देश पर पुलिस महानिरीक्षक "सीआर क्लीवलैंड" की अनुशंसा पर स्कूल से निष्काषित कर दिया गया ( पढ़े -द डायरेक्टर क्रिमिनल इंटेलिजेंस जनवरी 1914 पृष्ठ 97 इंडिया हाउस लन्दन ओर समाचार पत्र "केसरी" 5 जुलाई 1914 पृष्ठ 5 ओर गोविंद गणेश आवडे महाराष्ट्र 28 जुलाई 1940 पृष्ठ 12 )
रामपायली में सन 1908 में अगस्त माह में डॉ हेडगेवार ने पुलिस चौकी पर बम फेंका ,जो निकट के तालाब पर फटा ,पर पुलिस के पास कोई सबूत नही था इसलिए गिरफ्तारी से बच गए ..इसी स्थान पर अक्तूबर 1908 में दशहरे के रावण दहन कार्यक्रम में उन्होंने देशभक्ति पूर्ण जोशीला भाषण दिया ,पूरी भीड़ वन्देमातरम का नारा लगाने लगी .डॉ हेडगेवार पर अंग्रेजो ने राजद्रोही भाषण आईपीसी धारा 108 में केस दर्ज कर लिया (पढ़े -पोलिटिकल क्रिमिनल हूज हु पृष्ठ 97)

1909 में डॉ हेडगेवार यवतमाल आ गए यहां भी बांधव समाज की स्थापना ,पुलिस चौकी पर बम नाम फिर डॉ हेडगेवार जी का आया ..पर सबूत नही, तो डॉ हेडगेवार जी के विद्यालय को 1908 के अधिनियम 16 के तहत गैरकानूनी करार देकर बन्द कर दिया ( पढ़े फ़ाइल क्रमांक 26 -41 गृह राजनीतिक भाग A जून 1910 राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली )

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डॉ हेडगेवार जी का नाम उनकी देशभक्ति को देखकर क्रांतिकारी संगठन "अनुशीलन समिति "में जोड़ा गया(पढ़ें ,T चक्रबर्ती ,थर्टी इयर्स इन प्रिजन पृष्ठ 277-78 अल्फा बिटा प्रकाशन कलकत्ता 1963)
डॉ हेडगेवार क्रांतिकारियों में "कोकेन" के नाम से जाने जाते थे ,ओर"एनाटोमी",उनके शस्त्र का छद्म नाम था ,क्रांतिकारियों में उनका सम्मान था । (पढ़ें-,जोगेश चन्द्र चटर्जी ,इन सर्च ऑफ फ्रीडम पृष्ठ 27)

प्रसिद्ध क्रांतिकारी श्यामसुंदर चक्रवर्ती की पुत्री के विवाह में लोक सहायता ,मौलवी लियाकत हुसेन को फेज केप की जगह गांधी टोपी पहनाना उनके उल्लेखनीय कार्य थे (पढ़ें-अतुल्य रत्न घोष ,मॉडर्न रिव्यू मार्च 1941)

Achyut
Patwardan, Nana Patil and Aruna Asaf Ali were some of the prominent freedom
fighters of Quit India Movement who stayed in the houses of important RSS
leaders during their struggle.
Achyut Patwardhan, Nana Patil and Aruna Asaf Ali were some of the prominent freedom fighters of Quit India Movement who stayed in the houses of important RSS leaders during their struggle.

रासबिहारी बोस, विपिनचन्द्र पाल, से डॉ हेडगेवार का परिचय था ,हरदास ने उनके बारे में लिखा है कि अपनी देशभक्ति,संगठन कौशल,सात्विक चरित्र से हेडगेवार जी ने क्रांतिकारियों के दिल जीत लिये थे ।(पढ़ें-बालशास्त्री हरदास आर्म्ड स्ट्रुगल फ़ॉर फ्रीडम पृष्ठ 373 )
डॉ हेडगेवार बंगाल और मध्यप्रान्त के क्रांतिकारियों के बीच की कड़ी थे और नागपुर में क्रांतिकारियों के लिए शस्त्र छिपाकर लाया करते थे ।पढ़ें-जीवी केतकर रनझुनकर पी सी खान खोजे यांचा चरित्र पृष्ठ 12 


राष्ट्रीय मेडिकल कालेजो के छात्रों की क्रांतिकारी भूमिका के कारण यहां की डिग्री अमान्य करने के कारण ,नागपुर में डॉ हेडगेवार ने इस बिल के विरोध में प्रस्ताव पारित कराया जन आंदोलन खड़ा किया , जिससे अंग्रेजो को अपना निर्णय वापिस लेना पड़ा । *(पढ़ें -हितवाद 12 फरवरी 1916 पृष्ठ 7)

डॉ हेडगेवार जी ने प्रथम विश्वयुद्ध के समय अंग्रेजी सेना में युवकों की भर्ती का विरोध किया और जनजागरण किया कि यह अंग्रेजो के विरुद्ध उचित अवसर है! पढ़ें -"हितवाद" 29 जून 1918 पृष्ठ 7


[Left]: ‘Guruji’ Golwalkar with Ram Manohar Lohia:
Photo courtesy Tapan Gosh. [Right] ‘Guruji’ Golwalkar with Sant   Tukdoji Maharaj during the founding of the
VHP
Guruji’ Golwalkar with Ram Manohar Lohia and ‘Guruji’ Golwalkar with Sant  Tukdoji Maharaj 

डॉ हेडगेवार जी नागपुर ओर वर्धा में सक्रिय गुप्त क्रांतिकारी दल के सक्रिय सदस्य थे । ( पढ़ें -बालाजी हुद्दार the RRS & Netaji द इलेस्ट्रेड वीकली आफ इंडिया 7-13 अक्टूबर 1979 पृष्ठ 23 )

देश प्रेम के उत्कट भाव के कारण डॉ की डिग्री हासिल करने ,ओर परिवार की आर्थिक स्थिति दरिद्रता में होने पर भी आजादी की लड़ाई ओर संघ कार्य के लिए डॉ हेडगेवार जी ने प्रेक्टिस ओर नोकरी दोनों छोड़ दी । (पढ़ें केसरी 25 जून 1940 )

डॉ हेडगेवार असहयोग आंदोलन में कांग्रेस की नागपुर आंदोलन समिति में सक्रिय रहे और 11 नवम्बर 1920 से एक सप्ताह "असहयोग सप्ताह "के रूप में आयोजित कर अंग्रेज सरकार के राजस्व को खत्म करने के लिए नशाबंदी आंदोलन चलाया *(पढ़ें "महाराष्ट्र"2 फरवरी 1921)

डॉ हेडगेवार पर आमसभाओं में भाग लेने पर अंग्रेजी कोर्ट के निर्देष पर जिला अधीक्षक जेम्स इरविन के साईंन से नोटिस दिया गया ..लेकिन डॉ हेडगेवार ने खुला उल्लंघन किया !(पढ़ें महाराष्ट्र 20 अप्रेल 1921 पृष्ठ 7) !डॉ हेडगेवार पर अक्टूबर 1920 में काटोल ओर भारत वाड़ा की सभाओं में अंग्रेज विरोधी भड़काऊ भाषणों ओर 1908 के उग्र लेखन को लेकर आईपीसी धारा 108 के अंतर्गत मई 1921 में राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया ..डॉ हेडगेवार ने योजना पूर्वक अपनी पैरवी स्वयं की ..उन्हें 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा हुई । पढ़ें-फाइल नं 28 /1921 राजनीतिक भाग 1 पेरा 17 राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली !

डॉ हेडगेवार ने जेल में भी अनेक कष्ट झेलते हुए हिन्दू धर्म की जागृति की ,गीता महाभारत का पाठ बंदी साथियो को सुनाते थे और जलियावाला बाग हत्याकांड के विरोध में जेल में ही हड़ताल की ,11जुलाई 1922 को जेल से रिहा हुए । (पढ़ें पूर्वोक्त )

डॉ हेडगेवार ने जेल से बाहर आकर अंग्रेजो के विरुद्ध "स्वातंत्र्य" नामक समाचार पत्र का सम्पादन किया और अंग्रेजो के खिलाफ मोर्चा खोल दिया पत्र की पाठक संख्या 1200 हो गयी ।(पूर्वोक्त)
डॉ हेडगेवार ने पूर्ण स्वतंत्रता की मांग का पक्ष लिया , साइमन कमीशन का विरोध, सविनय अवज्ञा आंदोलन ,जंगल सत्याग्रह ,पुसद सत्याग्रह में भाग लिया 21जुलाई 1931 को पुनः गिरफ्तार कर आईपीसी की धारा 117 के अंतर्गत उन पर मुकदमा चलाया गया और फिर से 9 महीने के सश्रम कारावास की सजा हुई ,14 फरवरी 1931 को जेल से रिहा हुए । *पढ़ें -फाइल 88/33 ग्रह(राजनीतिक) राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली)
डॉ हेडगेवार ने भागानगर सत्याग्रह ,रामसेना ,जैसे विवादों का सामना किया ओर आरएसएस की स्थापना की (1925 केसरी पृष्ठ 02)! संघ को मिले समर्थन को देखकर सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस की शाखा में जाने पर अंग्रेजो ने रोक लगा दी थी । (पढ़ें -फाइल 88/33 ग्रह(राजनीतिक) राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली)


भारत मे अंग्रेजी सरकार के सचिव एम जी हैलेट ने 27 जनवरी 1933 को आरएसएस के बारे में जानकारी लेने एवम गतिविधियों को रोकने के निर्देश दिए ओर डॉ हेडगेवार को संघ का हिटलर कहा (पढ़े पूर्वोक्त पृष्ठ 3-4)! 20 दिसम्बर 1933 को अंग्रेजी मध्य भारत सरकार के स्थानिय स्वशासन विभाग ने नोटिस जारी कर संघ के कार्यक्रमो को रोकने की कार्यवाही की *(पढ़ें -,हितवाद 21 दिसम्बर 1933 पृष्ठ 5 )

डॉ हेडगेवार जी के नेतृत्व में संघ के सामाजिक कार्यो से प्रेरित होकर संघ के समर्थन में नागपुर नगर पालिका ने 10 मार्च 1921 को समर्थन प्रस्ताव भी पारित किया ! नागपुर में 30 दिसम्बर 1938 को संघ के कार्यक्रम में 15000 से अधिक लोग उपस्थित थे । (पढ़ें केसरी 5 जनवरी 1939 )! 

अंग्रेज अधिकारी सांडर्स की हत्या के बाद क्रांतिकारी राजगुरु को भूमिगत रहने एवम अन्य सहायता प्रदान की ।(पढ़ेंHMघोड़के ,रिवोल्यूशनरी नेशनलिज्म इन वेस्टर्न इंडिया पृष्ठ 173-174)! संघ के द्वारा शाखाओं में एक सैनिक संगठन की तरह प्रशिक्षण देने से अंग्रेज चिंतित थे ( फाइल संख्या 28/08/42 गृह विभाग (I) राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली)
बाला साहेब देवरस भी अंग्रेजो के विरुद्ध गुप्त रूप से संगठन कर रहे थे (पढ़ें-केशव स्मरामि सदा (खण्ड 1) पृष्ठ 11-12 सुरुचि साहित्य )

...............आरएसएस की उस समय जितनी क्षमता थी ,उसी के अनुरूप योगदान हुआ , स्वयंसेवको को भी अपने व्यक्तिगत स्तर पर पूरी तरह प्रेरणा और इस कार्य को करने की स्वतंत्रता थी , वीर सावरकर , नेताजी सुभाष बोस , गांधी जी ने भी डॉ साहब के योगदान की स्वयं उनसे मिलकर प्रशंसा की है
.. .......संघ आलोचकों को प्रत्युत्तर है कि .. वसंत ऋतु में यदि करील के वृक्ष पर पत्ते नहीं आते तो इसमें वसंत का क्या दोष है ? इसी प्रकार स्वाति नक्षत्र वर्ष का जल यदि चातक के मुंह में नहीं पड़ता तो इसमें मेघों का क्या दोष है सूर्य सबको प्रकाश देता है, पर यदि दिन में उल्लू को दिखाई नहीं देता तो इसमें सूर्य का क्या दोष है ? ?
इसी प्रकार की स्थिति इन कांगी वमियो की है ...ये पूर्वाग्रह से पीड़ित होकर वास्तविकता से अपरिचित होने का असफल उपक्रम करते हैं
....आओ जन जन में पूजनीय हेडगेवार ओर आरएसएस के योगदान की चर्चा करें ...नमस्ते सदा वत्सले मातृ भूमे। ...........