तीन सीटों से शुरू भारतीय जनसंघ की तीनसौ सीटों वाली भाजपा बनने तक के लम्बे सफर की कहानी !!

BJP

भारतीय जनता पार्टी 38 वर्ष में 11 करोड़ से ज्यादा सदस्यों के साथ आज दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है। भाजपा के तौर पर हमारी राजनीतिक यात्रा चाहे 38 वर्ष पूर्व प्रारम्भ हुई हो वास्तव में हमारी राजनीतिक जड़े 1951 में जनसंघ की स्थापना के समय से ही पूरे देश में विकसित होती रहीं हैं। 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सर संघचालक परम पूज्यनीय गुरु गोलवलकर जी की प्रेरणा से 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी। डॉ.मुखर्जी पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार में उद्योग और आपूर्ति मंत्री थे। डॉ. मुखर्जी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली और नेहरू के बीच हुए समझौते से नाराज होकर 6 अप्रैल 1950 को मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया था। 1951-52 के पहले आमचुनाव में डॉ.मुखर्जी सहित जनसंघ के तीन सदस्य चुने गए थे। 
जम्मू-कश्मीर में हर भारतीय से अनुमति पत्र लेने के निर्णय के विरोध में डॉ.मुखर्जी ने 1953 में सत्याग्रह प्रारम्भ किया और बिना अनुमति कश्मीर पहुंचे। कश्मीर में गिरफ्तारी के बाद 22 जून 1953 में वे देश के लिए न्यौछावर हो गए। डॉ.मुखर्जी के बलिदान के बाद देश में हजारों कार्यकर्ताओं ने जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी के लिए अपना खून बहाया। आज भाजपा के 15 राज्यों में मुख्यमंत्री हैं और छह राज्यों में हम मिलीजुली सरकारें चला रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बार-बार कहा है कि यह सब हमारे कार्यकर्ताओं के बलिदान और परिश्रम के कारण हुआ है। 
विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल भाजपा ही कार्यकर्ताओं की एकमात्र पार्टी है। देश में एकमात्र लोकतांत्रिक दल भाजपा ही है। कांग्रेस समेत ज्यादातर दल आज वंशवाद और जातिवाद के आधार पर राजनीति में टिके रहने की कोशिश रहे हैं तो भाजपा सबका साथ-सबका विकास नारे को लेकर चप्पे-चप्पे पर छा रही है। 
देश में आज राष्ट्रपति,  उपराष्ट्रपतिलोकसभा अध्यक्षप्रधानमंत्री और 15 राज्यों में मुख्यमंत्री भाजपा के कार्यकर्ता हैं। छह राज्यों में सहयोगी दलों की सरकारें हैं लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी है। राज्यसभा में 69 सदस्यों के साथ भाजपा सबसे बड़ा राजनीतिक दल है। राज्यसभा में पहली बार भाजपा के 69 सदस्य पहुंचे हैं। यह सब भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं की तपस्या का परिणाम है। हमारे नेताओं और कार्यकर्ताओं के समर्पणबलिदान और त्याग के कारण ही आज हम इस मुकाम पर पहुंचे हैं। 
डॉ.मुखर्जी के बाद जनसंघ को विस्तार को कुछ झटका तो लगा पर कार्यकर्ताओं के दम पर पार्टी बढ़ती रही है। जनसंघ को दूसरा झटका पंडित दीनदयाल उपाध्याय के बलिदान से लगा। देश की आजादी के बाद देश की एकता और अखंडता के लिए किसी भी राजनेता का ये पहला बलिदान था। पंडित दीनदयालजी की हत्या के बाद माननीय अटल बिहारी वाजपेयीलालकृष्ण आडवाणीकुशाभाऊ ठाकरेसुंदर सिह भंडारीप्यारेलाल खंडेलवाल और अन्य नेताओं के मार्गदर्शन में जनसंघ आगे बढ़ती रही। 1975 में आपातकाल में सबसे ज्यादा अत्याचार राष्ट्रीय सेवक संघ और जनसंघ के कार्यकर्तांओं ने सहे। 1977 में देश में लोकतंत्र की स्थापना की खातिर जनसंघ का जनता पार्टी में विलय कर दिया गया। लंबे राजनीतिक घटनाक्रम के बाद 6 अप्रैल 1980 को भाजपा की स्थापना हुई और अटल बिहारी वाजपेयी पहले अध्यक्ष बने। भाजपा डॉ.मुखर्जी के आदर्शों और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के मार्ग पर आगे बढ़ती रही। भाजपा पर इस दौरान कई संकट आए पर धीरे-धीरे भाजपा का असर पूरे देश में बढ़ता रहा। 
2004 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की हार के बाद केंद्र पर कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार का कब्जा रहा। 2014 में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़े गए लोकसभा चुनाव में पार्टी ने नया इतिहास रचा। लोकसभा में पहली बार भाजपा को 282 सीटों पर कामयाबी तो मिली साथ ही 30 साल बाद किसी राजनीतिक दल को भी सदन में पूर्ण बहुमत मिला। माननीय मोदीजी के नेतृत्व में देश को ऐसी पहली सरकार भी मिली कि जिसके किसी मंत्री पर कोई दाग नहीं लगा पाया।
मोदी सरकार ने वोट बैंक की परवाह न करते हुए नोटबंदीकालेधन के खिलाफ कार्रवाईतीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने जैसे फैसले किए। गांवगरीबकिसानमजदूरमहिलाबुजर्गबच्चे और समाज के कमजोर तबकों की तरक्की के लिए योजनाओं की शुरुआत की। यही कारण है मोदी सरकार के कार्यों और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जमीनी राजनीतिक रणनीति के कारण पार्टी के 2014 के बाद हरियाणामहाराष्ट्रझारखंडउत्तर प्रदेशउत्तराखंडअसमअरुणाचल प्रदेशमणिपुरहिमाचल प्रदेश और त्रिपुरा में भाजपा की मुख्यमंत्री बने। गोआ और गुजरात में फिर से भाजपा जीती। मध्य प्रदेशराजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी भाजपा सरकारें हैं। देश की सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस अब केवल कर्नाटकपंजाबमिजोरम और पुद्दूचेरी तक सिमट गई है। कम्युनिस्टों का लगातार पतन हो रहा है। त्रिपुरा में भाजपा की सरकार बनने के बाद कम्युनिस्टों की सरकार अब केवल केरल में है। जाति और मजहब को लेकर राजनीति करने वाले दल भी भाजपा की बढ़ती ताकत से परेशान हैं। देश में तीसरे मोर्चे बनाने की कवायद चल रही है। 
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने त्रिपुरा में पार्टी की सरकार बनने के बाद कहा था कि अभी भाजपा का स्वर्ण युग नहीं आया है। उन्होंने कहा है कि केरलपश्चिम बंगाल और ओडिशा में भाजपा की सरकार बनने के बाद पार्टी का स्वर्ण युग आएगा। इस समय कर्नाटक में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि वहां भाजपा की सरकार बनेगी। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाजपा की बढ़ती ताकत से परेशान होकर कभी दिल्ली की तरफ दौड़ लगाती है तो कभी दूसरे राज्यों में विपक्षी नेताओं से फोन पर बात करती हैं। भाजपा के खिलाफ आवाज उठाने वाली ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का गला घोंट दिया है।
भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं को झूठे मामले बनाकर जेल भेजा जा रहा है। भाजपा कार्यकर्तोओं पर जानलेवा हमले किए जा रहे हैं। हमारे कई कार्यकर्ताओं हिंसक वारदातों में बलिदान हुए हैं। कर्नाटककेरल जैसे राज्यों में भी हमारे कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई हैं। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कर्नाटक में कहा भी है कि कार्यकर्ताओं का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
भाजपा स्थापना दिवस पर देशहित हेतु सदैव बलिदान देने वाले हजारों कार्यकर्ताओं को भावभीनी श्रद्धाजंलि। साथ ही भाजपा की राजनीतिक यात्रा में भागीदार बने, करोड़ो साथियों को नए संघर्ष हेतु शुभकामनाएं।
आईए! देश में नई राजनीति का प्रारम्भ करने वाले मोदी और शाह की अगुवाई में हम अभी से आगामी आमचुनाव और राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए एकजुट होकर लग्न के साथ कार्य करें।
Narendra Modi - Amit ShahKailash Vijayvargiya | National General Secretary, BJP